नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों का बोझ घटाने के लिए पांच रिटायर्ड जजों को तदर्थ जज नियुक्त करने की मंजूरी दी है। ये नियुक्ति अनुच्छेद 224-A के तहत दो साल के लिए होगी। एड-हॉक जज अस्थायी तौर पर सुनवाई करेंगे। कॉलेजियम ने साफ किया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों के भारी दबाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। तदर्थ जज अस्थायी तौर पर बैठकर मामलों की सुनवाई करेंगे। इससे पुराने केसों की तेजी से सुनवाई हो सकेगी। यह प्रावधान संविधान में पहले से मौजूद है, लेकिन इसका उपयोग बहुत कम बार किया गया है। अब बढ़ते लंबित मामलों को देखते हुए इसे सक्रिय रूप से लागू किया जा रहा है।अनुच्छेद 224-A क्या कहता है?संविधान का अनुच्छेद 224-A हाईकोर्ट में तदर्थ जज नियुक्त करने का अधिकार देता है। इसके तहत किसी हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, किसी रिटायर्ड जज को दोबारा उसी या किसी अन्य हाईकोर्ट में अस्थायी जज के रूप में बैठने का अनुरोध कर सकते हैं। इन जजों को नियमित जज की तरह ही अधिकार मिलते हैं। इसका मकसद अदालतों में काम का बोझ कम करना है।
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