बांदा। चित्रकूट में 50 नाबालिग बच्चों का यौन शोषण कर उनकी अश्लील तस्वीरें व पोर्न वीडियो इंटरनेट मीडिया के माध्यम से बेचकर कमाई करने के मामले में कड़ा फैसला आया। बांदा में विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने शुक्रवार को चित्रकूट में सिंचाई विभाग के निलंबित जेई रामभवन व उसकी पत्नी दुर्गावती को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों को तब तक फांसी पर लटकाने का आदेश दिया, जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए। पत्रावली में उपलब्ध साक्ष्यों, सीबीआइ के अधिवक्ता अभियोजन धारा सिंह मीना व बचाव पक्ष के अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने गुरुवार को 163 पृष्ठीय फैसले को सुरक्षित कर लिया था। अदालत ने रामभवन पर 6.45 लाख व दुर्गावती पर 5.40 लाख रुपये का अर्थदंड लगाया गया है। अदालत ने जुर्माने व सरकार से मिलने वाली सहायता राशि से साक्ष्य व गवाह बने पीड़ित बच्चों को 10-10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने, रामभवन के पास से जब्त आठ लाख रुपये, उस पर मिले ब्याज सहित संपूर्ण धनराशि को पीड़ित बच्चों में बराबर बांटने का आदेश दिया है। जेई की काली करतूत का लिंक सोनभद्र के अनपरा से मिला था। डेढ़ माह जाल बुनकर सीबीआइ ने जेई को नवंबर, 2020 में कर्वी की एसडीएम कालोनी स्थित किराये के घर से दबोचा था। बांदा में विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट ने बीते छह माह में तीसरी बार फांसी की सजा सुनाई है। अब तक पांच अभियुक्तों को मृत्युदंड की सजा दे चुके हैं। निलंबित जेई रामभवन व पत्नी दु्र्गावती को सीबीआइ ने 17 नवंबर, 2020 को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। दुर्गावती की जमानत उच्च न्यायालय से हो गई थी। उसे दोबारा 18 फरवरी,2026 को इसी मामले में दोषी पाकर उसको जेल भेजा गया था, तभी से दोनों बांदा जेल में बंद हैं व निर्णय के बाद फिर दोनों को जेल भेज दिया गया। सीबीआइ ने 31 अक्टूबर,2020 को नई दिल्ली में मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
बांदा कोर्ट का कड़ा फैसला: चित्रकूट यौन शोषण केस में जेई दंपती को फांसी, नाबालिगों का शोषण कर बेचते थे पोर्न वीडियो




